जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को गिराने का आदेश, आरडीए ने बिना स्वीकृत नक्शे का बताया निर्माण
- By Gaurav --
- Thursday, 16 Jul, 2026
RDA Orders Demolition of 38 Buildings
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित बताते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय की स्थापना समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान ने की थी। वर्तमान में वह जेल में बंद हैं और विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत सुनवाई और अभिलेखों की जांच के बाद यह आदेश जारी किया गया। रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि जौहर विश्वविद्यालय परिसर में कथित रूप से बिना अनुमति किए गए निर्माण के संबंध में क्षेत्रीय कनिष्ठ अभियंता की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की गई।
विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। संस्थान ने 8 जुलाई को जवाब दाखिल किया, जबकि 15 जुलाई को विश्वविद्यालय और रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं की मौजूदगी में व्यक्तिगत सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से दलील दी गई कि सिंगनखेड़ा गांव, जहां विश्वविद्यालय स्थित है, 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। इसलिए भवन निर्माण के लिए आरडीए से स्वीकृति लेना आवश्यक नहीं था। यह भी कहा गया कि अधिकांश इमारतों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था, इसलिए वर्तमान नियमों के आधार पर उन्हें अवैध नहीं माना जा सकता।
हालांकि, रामपुर विकास प्राधिकरण ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण के समय लागू कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य था। प्राधिकरण के अनुसार, जिला पंचायत के अभिलेखों में केवल मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे स्वीकृत पाए गए, जबकि शेष 38 इमारतों के लिए कोई वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं है।
आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्माण स्वीकृति की आवश्यकता की जानकारी थी, क्योंकि उसने दो इमारतों के लिए अनुमति प्राप्त की थी। इसके बावजूद अन्य 38 भवनों का निर्माण बिना स्वीकृति के कराया गया।
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित अधिनियम के तहत हुई थी। बाद में विश्वविद्यालय भूमि से जुड़े कथित अवैध कब्जे और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन सहित कई कानूनी विवादों में घिर गया। वर्ष 2026 की शुरुआत में आजम खान और उनका परिवार औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय का संचालन करने वाले ट्रस्ट से अलग हो गया था।
आरडीए के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता फखरूल हसन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन रावत ने भी कार्रवाई को विपक्ष के खिलाफ "बुलडोजर नीति" करार देते हुए सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की गई है।